‘जब हम अपने हर विशेष पारिवारिक एवं सामाजिक कार्यों के समय स्थानीय वेशभूषा धारण करते हैं तो जिन्दगी के इतने अहम पड़ाव (डिग्री हासिल करते वक्त) पर ही क्यों दूसरों की सभ्यता को जबरिया धारण करते हैं.’’from Latest News उत्तर प्रदेश News18 हिंदी https://ift.tt/2PkvBuq
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